संदेश

जनवरी 11, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

📘 Rich Dad Poor Dad – Chapter 7 : Overcoming Obstacles (रुकावटों को पार करना)

चित्र
बाधाओं को पार करना (Overcoming Obstacles) ✍️ लेखक: भूपेन्द्र दाहिया 📚 पुस्तक: Rich Dad Poor Dad – Robert Kiyosaki नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका मेरे ब्लॉग  dahiyabhupend.blogspot.com पर।  हम अक्सर सोचते हैं कि पैसे की कमी, नौकरी न मिलना, या संसाधनों का अभाव हमें आगे बढ़ने से रोकता है। असली रुकावटें बाहर नहीं, हमारे मन के अंदर होती हैं। अगर इंसान अपने अंदर की कमजोरियों पर जीत पा ले, तो गरीबी से अमीरी तक का रास्ता अपने आप खुल जाता है लेकिन Chapter 7 में Rich Dad एक गहरी बात बताते हैं — पिछले अध्याय (Chapter 6) में हमने सीखा कि “नौकरी पैसे के लिए नहीं, बल्कि सीखने के लिए करनी चाहिए।” आज Chapter 7 में रॉबर्ट कियोसाकी बताते हैं कि अमीर बनने से हमें बाहर की नहीं, बल्कि अंदर की बाधाएँ रोकती हैं। यानी असली दुश्मन हमारा डर, आलस्य, संदेह और अहंकार है। “गरीब लोग पैसे की कमी से नहीं,बल्कि सोच की कमी से गरीब रहते हैं।”अमीर और गरीब में फर्क संसाधनों का नहीं, सोच और साहस का होता हैं। 📘 Rich Dad Poor Dad – Chapter 7 : Overcoming Obstacles (रुकावटों को पार करना) इस अध्याय में Robert Kiyo...

🇮🇳 भारतीय सेना दिवस – 15 जनवरी

चित्र
नमस्कार दोस्तों! मैं भूपेंद्र दाहिया आप सभी को भारतीय सेना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। 15 जनवरी का दिन भारत के लिए गर्व का प्रतीक है। यह वही दिन है जब 1949 में लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. करियप्पा ने भारतीय सेना की पहली स्वदेशी कमान संभाली थी। हमारी भारतीय सेना – सीमा पर ढाल है, देश का अभिमान है, और हर नागरिक की सुरक्षा का संकल्प है। आइए, आज के दिन हम अपने वीर जवानों को नमन करें, उनके बलिदान को याद करें, और राष्ट्र सेवा की भावना को अपनाएँ। 🇮🇳 Army Day – भारतीय सेना दिवस: गौरव, इतिहास और महत्व 🔷 Army Day क्या है? Army Day (भारतीय सेना दिवस) हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सेना के शौर्य, बलिदान और राष्ट्रसेवा को समर्पित होता है। इस दिन देश अपने वीर सैनिकों को सम्मान और कृतज्ञता अर्पित करता है। 🔷 Army Day क्यों मनाया जाता है? 15 जनवरी 1949 को लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. करियप्पा ने भारतीय सेना की पहली स्वदेशी कमान संभाली थी। ब्रिटिश शासन के बाद पहली बार भारतीय सेना का नेतृत्व एक भारतीय अधिकारी के हाथों में आया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में 15 जनवरी को Army D...

गुजरात के वडोदरा में मकर संक्रांति और उत्तरायण – मंदिर दर्शन, बाजार और पत्नी संग यादगार दिन | Jakida Wale Blog

चित्र
गुजरात के वडोदरा में मकर संक्रांति और उत्तरायण – मंदिर दर्शन, बाजार और यादगार दिन लेखक : भूपेंद्र दहिया | Jakida Wale Blog भारत के त्योहार सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाले रंग हैं। ऐसा ही एक रंगीन और यादगार दिन मेरे जीवन में आया – मकर संक्रांति और उत्तरायण, जिसे मैंने अपनी पत्नी के साथ गुजरात के वडोदरा शहर में बड़े उत्साह के साथ मनाया। यह दिन सिर्फ पतंगों का नहीं था, यह दिन भक्ति, प्रेम और संस्कृति का संगम था। सुबह की शुरुआत – मंदिर में भगवान के दर्शन happy sankarti मकर संक्रांति के पावन दिन हमने सबसे पहले वडोदरा के प्रसिद्ध मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन किए। Balaji mandir vaikunth vadodra मंदिर का वातावरण बेहद शांत और भक्तिमय था। चारों ओर घंटियों की आवाज, धूप-अगरबत्ती की खुशबू और श्रद्धालुओं की आस्था – मन को भीतर तक सुकून दे रही थी। भगवान के चरणों में माथा टेककर मैंने अपने परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस शुभ दिन पर मंदिर दर्शन करना हमारे लिए जीवन की सबसे सुंदर याद बन गया। उत्तरायण का उत्सव – आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें मंदिर से निकलते ही वडोदरा की सड़कों पर उत्त...

हमारे लोक साहित्य में पेड़–पौधों का जीवन–ज्ञान

हमारे लोक साहित्य में पेड़-पौधों और उनके गुणधर्म ०– पद्मश्री बाबूलाल दाहिया जी  प्रस्तुति : भूपेंद्र दाहिया | दाहिया ब्लॉग 🌿 भूमिका हमारे बघेली लोक साहित्य में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि पेड़–पौधे, वनस्पतियाँ और प्रकृति भी जीवित पात्रों की तरह उपस्थित हैं। उनके गुणधर्मों पर कहावतें हैं, लोककथाएँ हैं, और जीवन–ज्ञान छिपा हुआ है। प्राचीन मनीषियों ने समस्त जीव-जगत को दो वर्गों में बाँटा — 1. स्थावर – जो एक स्थान पर स्थिर रहते हैं – पेड़, पौधे, वनस्पतियाँ। 2. जंगम – जो चलायमान हैं – पशु, पक्षी, कीड़े, मनुष्य। --- 🌱 स्थावर और जंगम का अद्भुत संबंध स्थावर प्राणी एक स्थान छोड़कर नहीं जाते। आग लगे तो वहीं जलते हैं, बाढ़ आए तो वहीं डूबते हैं। परंतु जंगम प्राणी खतरा देखकर स्थान बदल लेते हैं। फिर भी दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। पेड़ सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, लेकिन उन्हें कार्बन-डाइऑक्साइड चाहिए — और उसके प्रदाता हम जंगम प्राणी हैं। बदले में पेड़ हमें प्राणवायु ऑक्सीजन देते हैं। यह प्रकृति का अद्भुत संतुलन है। --- 🍃 पेड़ों की मौन सेवा पेड़ों के पास न आँख हैं, न कान — फिर भ...

विश्व हिन्दी दिवस और धान के मेरखुआ-टुटेशन की रोटी ✍️ लेखक : बाबूलाल दाहिया

चित्र
नमस्कार दोस्तों, आज हम पद्मश्री बाबूलाल दाहिया जी द्वारा रचित उस विशेष लेख से परिचित होने जा रहे हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि भारत में धान की लगभग 200 से अधिक किस्में प्रचलित हैं। इन किस्मों के कई नाम कभी हमारी स्थानीय बोलियों में प्रचलित थे, लेकिन समय के साथ वे इतने व्यापक रूप से उपयोग में आए कि आज वे हिन्दी भाषा के स्थायी शब्द बन चुके हैं। यह लेख केवल धान की किस्मों का परिचय नहीं, बल्कि हिन्दी भाषा के निर्माण में लोकबोलियों के अमूल्य योगदान की जीवंत झलक है। आज पद्मश्री बाबूलाल दाहिया जी गुजरात प्रवास में हैं, और वहीं से यह महत्वपूर्ण ज्ञान-सृजन हम तक पहुँचा रहे हैं। आइए, उनके इस विचार-यात्रा में सहभागी बनें… विश्व हिन्दी दिवस और धान के मेरखुआ-टुटेशन की रोटी लोकभाषा और संस्कृति पर विशेष लेख लेखक : पद्मश्री बाबूलाल दाहिया जी प्रस्तुति : भूपेंद्र दाहिया विश्व हिन्दी दिवस को गुज़रे अब कुछ दिन हो चुके हैं, लेकिन हिन्दी और उसकी लोकबोलियों पर चिंतन का अवसर कभी समाप्त नहीं होता। इसी भाव के साथ यह लेख प्रस्तुत है —   जहाँ भाषा, कृषि और संस्कृति एक साथ बोलती हैं। लोकभाषा और संस्कृति प...

स्वामी विवेकानंद जयंती – राष्ट्रीय युवा दिवस पर जीवन परिचय और प्रेरक विचार

चित्र
स्वामी विवेकानंद जयंती – भारत के युवा चेतना के महान प्रेरक “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” — स्वामी विवेकानंद हर वर्ष 12 जनवरी को हम स्वामी विवेकानंद जयंती मनाते हैं। यह दिन केवल एक महान संत की जन्मतिथि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में पूरे भारत में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों, भाषणों और जीवन से भारत को आत्मगौरव, आत्मविश्वास और सेवा का मार्ग दिखाया। गुरु जी टेक  आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे – • स्वामी विवेकानंद कौन थे • उनका जन्म और परिवार • शिक्षा और दीक्षा • जीवन की प्रमुख घटनाएँ • वे इतने प्रसिद्ध क्यों हुए • उनकी मृत्यु कैसे हुई • 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस क्यों कहा जाता है स्वामी विवेकानंद का जन्म स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता), पश्चिम बंगाल में हुआ था। उनका बचपन का नाम था – 👉 नरेन्द्रनाथ दत्त उनके माता-पिता पिता: श्री विश्वनाथ दत्त वे कलकत्ता हाईकोर्ट में प्रसिद्ध वकील थे। तर्क, विद्वत्ता और आधुनिक सोच उनके व्यक्तित्व में थी। माता: श्रीमती भुवनेश्वरी देवी वे धार्मिक, संस्...

पद्मश्री बाबूलाल दाहिया जी के साथ गुजरात में किसान स्वराज सम्मेलन 2026

चित्र
पद्मश्री बाबूलाल जी दाहिया की गुजरात यात्रा – किसान स्वराज सम्मेलन 2026 की अंदरूनी झलक नमस्कार दोस्तों,  मैं भूपेंद्र दहिया 11 जनवरी 2026 को मेरी आत्मीय बातचीत पद्मश्री सम्मानित बाबूलाल दाहिया जी से हुई। बातचीत के दौरान बाबू जी ने स्नेहपूर्वक मेरा परिचय पूछा और बताया कि वे इन दिनों गुजरात में किसान स्वराज सम्मेलन 2026 के कार्यक्रम में उपस्थित हैं। संयोग से मैं भी गुजरात में वडोदरा शहर में रहता हूँ। मन में उनसे मिलने की तीव्र इच्छा हुई, परंतु बाबू जी का कार्यक्रम लोक निकेतन (पालनपुर क्षेत्र) में था, जो वडोदरा से काफी दूर है। कार्यक्रम सीमित समय का था और मेरी नौकरी से छुट्टी केवल रविवार को ही संभव थी, इसलिए उनसे प्रत्यक्ष भेंट नहीं हो सकी। हालाँकि दूरभाष पर बाबू जी ने पूरे कार्यक्रम की महत्वपूर्ण जानकारियाँ, अपने अनुभव और विचार मुझे साझा किए। उन्हीं जानकारियों के आधार पर यह ब्लॉग मैं आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ। गुजरात की धरती से उठी किसान स्वराज की आवाज़ किसान स्वराज सम्मेलन 2026 – बीज संप्रभुता की रक्षा का राष्ट्रीय संकल्प किसान स्वराज सम्मेलन 2026 जब देश की कृषि व्यवस्था कॉ...