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20 फरवरी 2025 – रीवा से मैहर तक बघेली परंपराओं में सम्पन्न मेरा विवाह | प्रथम वर्षगांठ विशेष

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💐 पहली सालगिरह पर – बघेली परंपराओं में बंधा हमारा विवाह 💐 स्थान: धौचट (रीवा) से पिपरा कला (मैहर) विवाह तिथि: 20 फरवरी आज हमारी शादी को एक वर्ष पूरा हुआ। 20 फरवरी का वह पावन दिन आज भी उतना ही ताज़ा है, जब रीवा और मैहर की पावन धरती ने हमारे जीवन को एक सूत्र में बाँध दिया। 📜 रीवा–मैहर क्षेत्र की प्रमुख विवाह रस्में (क्रम अनुसार) 🪔 रिश्ता तय होना – बारिछा / रोका की वह पावन घड़ी दोस्तों, हमारे रीवा–मैहर अंचल में जब शादी पक्की हो जाती है तो “बारिछा” या “रोका” की रस्म से उस रिश्ते को सामाजिक स्वीकृति दी जाती है। मेरे जीवन में यह पल 1 फरवरी 2024 को आया। उस समय मैं अपने कार्य के कारण वडोदरा में रहता था, लेकिन कुछ दिनों की छुट्टी लेकर अपने गृह ग्राम धौचट (रीवा) आया हुआ था। तभी मेरी पत्नी रोशनी जी के पिताजी और उनके बड़े भाई मुझे देखने हमारे घर आए। परिवार के बीच आत्मीय बातचीत हुई और उसी दिन मुझे रोशनी को देखने के लिए मैहर ज़िले के पिपरा कला गाँव बुलाया गया। जब मैं अपने परिवार के बड़े सदस्यों के साथ वहाँ पहुँचा, तो रोशनी का सरल स्वभाव, मधुर व्यवहार और उनके परिवार की सादगी ने सबका मन जीत लिया। उ...