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2025 के धनतेरस की पूरी कहानी”

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नमस्कर दोस्तो आज हम  धनतेरस 2025 का पूरी तरह से  ब्लॉग के मध्यम जानेंगे  , जिसमें धार्मिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और आर्थिक पहलू सभी शामिल हैं। happy dhantersh 🪔  धनतेरस 2025: क्यों खास है, बाजार में उत्साह और गिफ्ट देने की परंपरा लेखक: भूपेंद्र दाहिया ब्लॉग: https://dahiyabhupend.blogspot.com नमस्कार दोस्तों! धनतेरस दीवाली महापर्व की शुरुआत है। यह सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि व्यापार, सामाजिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं, क्यों यह दिन इतना खास है और बाजार, गिफ्ट और खरीदारी से कैसे जुड़ा है।   धनतेरस 2025 कब है? तारीख:  18 अक्टूबर 2025  यह कार्तिक माह की त्रयोदशी तिथि को आता है।   धनतेरस क्यों खास है? 1️⃣ धन और समृद्धि का प्रतीक इस दिन भगवान कुबेर (धन के देवता) और भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के जनक) की पूजा की जाती है। लोग सोना, चांदी, नए बर्तन या व्यापारिक सामग्री खरीदते हैं। इसका मकसद है संपन्नता, खुशहाली और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना। 2️⃣ स्वास्थ्य का महत्व भगवान धन्वंतरि इस दिन अमृत कलश के साथ प्रक...

नदियाँ बचाएँ – नदी दिवस 2025 और अविरल नदियों का महत्व

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नमस्कर दोस्तो मैं भूपेन्द्र दाहिया, एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाला ब्लॉग लेखक और सामाजिक चिंतक हूँ। अपने अनुभवों और समाज के परिवेश को लेखों के माध्यम से साझा करना मेरा उद्देश्य है। मेरा विश्वास है कि गाँव की मिट्टी, परंपरा और शिक्षा — तीनों मिलकर ही असली भारत का निर्माण करते हैं। नदियाँ बचाएँ इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए, मैं आज के इस लेख की शुरुआत एक ऐसे व्यक्तित्व के नाम से करना चाहता हूँ जिन्होंने न केवल कृषि क्षेत्र में नवाचार किया, बल्कि हिंदी साहित्य में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी — पद्मश्री सम्मानित श्री बाबूलाल दाहिया जी। वे एक सम्मानित कृषक, कवि और लेखक हैं, जिन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि मिट्टी से जुड़ा इंसान भी शब्दों की दुनिया में अमर हो सकता है। उनकी कविताएँ हमें धरती से जोड़ती हैं, और उनकी सोच हमें यह सिखाती है कि परंपरा और प्रगति दोनों साथ-साथ चल सकती हैं।  “एक दिन जब मैं गुजरात में रहते हुए एक गांव गया था अपने कुछ मित्रों के साथ नदी के किनारे खड़े नदी का प्रकृति नजारा बहुत सुंदर लगा रहा था नदी के पास खड़ा था, तो मुझे बाबूलाल दाहिया जी की यह पंक्ति याद आई...” ज...