“भगवान बिरसा मुंडा – धरती आबा की अमर कहानी”
भगवान बिरसा मुंडा : धरती आबा की अद्भुत गाथा लेखक – भूपेन्द्र दाहिया भारत के इतिहास में कई महानायक हुए, लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं बनते बल्कि लोगों के दिलों में भगवान के रूप में बस जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है— भगवान बिरसा मुंडा , जिन्हें आदिवासी समाज प्रेम और सम्मान से “धरती आबा” कहकर पुकारता है। वे भारत की स्वतंत्रता, धर्म-सुधार और सामाजिक जागरण के महान प्रतीक माने जाते हैं। “धरती आबा बिरसा मुंडा” 🌿 बिरसा मुंडा का जन्म और प्रारंभिक जीवन बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड (तत्कालीन बिहार) के छोटे से गाँव उलिहातु में हुआ। वे मुंडा जनजाति से थे। बचपन से ही तेज, साहसी और नेतृत्व क्षमता से भरे हुए बिरसा ने जंगल, समाज और परंपरा से सीधा जुड़ाव महसूस किया। गरीबी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मिशन स्कूल में शिक्षा ली, लेकिन बाद में जाति परिवर्तन के दवाब के कारण पढ़ाई छोड़ दी। 🔥 धरती पर अवतार – क्यों कहलाए ‘भगवान’ आदिवासी समाज के बीच बिरसा मुंडा को भगवान का दर्जा इसलिए मिला क्योंकि— ✔️ 1. उन्होंने समाज को एकजुट किया जनजातीय...