“मेरे भाई धनराज – यादों की अमर लौ”
हमारे प्रिय धनराज – यादों का अमिट दीपक 10 अक्टूबर 1996 – यह वह दिन है जब हमारे घर में खुशियाँ आईं। उस दिन हमारे प्रिय धनराज का जन्म हुआ। माँ-बाप, भाई-बहन और पूरे परिवार के लिए वे हमेशा हँसी-खुशी और आशा की किरण बने रहे। ओल्ड मेमोरी बचपन से ही वे सरल, मेहनती और परिवार की जिम्मेदारियों को समझने वाले इंसान थे। 2013 में हाई स्कूल (हायर सेकेंडरी) की पढ़ाई पूरी करने के बाद , घर की स्थिति को देखकर उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी। 12वीं कक्षा के बाद वे परिवार की मदद के लिए कमाने लगे। संघर्ष और मेहनत शुरुआत में वे गाँव के एक व्यापारी के साथ DJ साउंड में काम करने लगे। मौसम और काम की अनिश्चितता के कारण उन्होंने नया रास्ता चुना। उन्होंने कार चलाना सीखा और ड्राइविंग में अपना भविष्य बनाने की ठान ली। काम की तलाश में वे बेंगलुरु और मुंबई भी गए, लेकिन वहाँ कुछ जम न सका। अंततः वे रीवा लौट आए और यहीं से उन्होंने ड्राइविंग को अपना करियर बना लिया। ड्राइविंग कैरियर कि शुरुआत धीरे-धीरे वे बिजली विभाग के अधिकारियों और व्यापारियों की गाड़ियाँ चलाने लगे। मेहनत और ईमानदारी से वे परिवार की ...