पद्मश्री बाबूलाल दाहिया जी के साथ गुजरात में किसान स्वराज सम्मेलन 2026
पद्मश्री बाबूलाल जी दाहिया की गुजरात यात्रा – किसान स्वराज सम्मेलन 2026 की अंदरूनी झलक
नमस्कार दोस्तों,
मैं भूपेंद्र दहिया 11 जनवरी 2026 को मेरी आत्मीय बातचीत पद्मश्री सम्मानित बाबूलाल दाहिया जी से हुई। बातचीत के दौरान बाबू जी ने स्नेहपूर्वक मेरा परिचय पूछा और बताया कि वे इन दिनों गुजरात में किसान स्वराज सम्मेलन 2026 के कार्यक्रम में उपस्थित हैं। संयोग से मैं भी गुजरात में वडोदरा शहर में रहता हूँ। मन में उनसे मिलने की तीव्र इच्छा हुई, परंतु बाबू जी का कार्यक्रम लोक निकेतन (पालनपुर क्षेत्र) में था, जो वडोदरा से काफी दूर है। कार्यक्रम सीमित समय का था और मेरी नौकरी से छुट्टी केवल रविवार को ही संभव थी, इसलिए उनसे प्रत्यक्ष भेंट नहीं हो सकी। हालाँकि दूरभाष पर बाबू जी ने पूरे कार्यक्रम की महत्वपूर्ण जानकारियाँ, अपने अनुभव और विचार मुझे साझा किए। उन्हीं जानकारियों के आधार पर यह ब्लॉग मैं आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ।
गुजरात की धरती से उठी किसान स्वराज की आवाज़
किसान स्वराज सम्मेलन 2026 – बीज संप्रभुता की रक्षा का राष्ट्रीय संकल्प
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| किसान स्वराज सम्मेलन 2026 |
जब देश की कृषि व्यवस्था कॉर्पोरेट नीतियों के दबाव से गुजर रही है, ऐसे समय में गुजरात के लोक निकेतन से उठी आवाज़ आशा की नई किरण बनकर सामने आई है। किसान स्वराज सम्मेलन 2026 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसान अधिकार, बीज स्वतंत्रता और खाद्य सुरक्षा की रक्षा का राष्ट्रीय मंच है। इस सम्मेलन में हमारे संगठन के सम्माननीय सदस्य बाबूलाल जी दाहिया स्वयं उपस्थित हैं। उनके प्रत्यक्ष अनुभव और विचार मुझे समाज तक पहुँचाने का अवसर मिला, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
किसान स्वराज सम्मेलन 2026 – गुजरात की धरती से उठी चेतना
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| पद्मश्री सम्मानित बाबूलाल दाहिया जी |
स्थान : लोक निकेतन, गुजरात
दिनांक : 11 से 13 जनवरी 2026
बाबू जी ने बताया कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बीज स्वराज, किसान स्वराज और खाद्य सुरक्षा की रक्षा का राष्ट्रीय मंच है। देश के विभिन्न राज्यों से किसान संगठन, कृषि विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता यहाँ एकत्र हुए हैं, ताकि खेती और किसान को कॉर्पोरेट नियंत्रण से बचाया जा सके।
उद्घाटन सत्र – प्रेरक मंच और विचारशील उपस्थिति
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| उद्घाटन सत्र – प्रेरक मंच और विचारशील उपस्थिति |
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का मंच संचालन छत्तीसगढ़ के संगठन ‘भूमगादी’ से श्री आकाश बड़ावे द्वारा किया गया।
मंच पर बाएँ से दाएँ जिन विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही —
किरण भाई चावड़ा – गांधीवादी संस्था लोक निकेतन, कार्यक्रम स्थल के संचालक
बाबूलाल जी दाहिया – हमारे संगठन एवं व्हाट्सएप ग्रुप के सम्माननीय सदस्य
देविंदर शर्मा – पंजाब से ख्यातनाम कृषि नीति विशेषज्ञ
श्रीमती संतोष पचारे – राजस्थान से राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कृषक
प्रोफेसर शंभू प्रसाद – त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय
कविता कुरुगंटी – संगठन आशा, कर्नाटक
इन सभी विचारशील व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने उद्घाटन सत्र को किसान हितों पर केंद्रित, वैचारिक और प्रेरणादायी बनाया।
सम्मेलन का मूल संदेश :
विविधता | संप्रभुता | टिकाऊपन | शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व
भारत के उत्तरी और पश्चिमी राज्यों के किसानों को संगठित कर
बीज स्वराज, किसान स्वराज और खाद्य स्वराज
की दिशा में यह सम्मेलन एक ऐतिहासिक पहल है।
बीज विधेयक 2025 – बीज संप्रभुता पर गंभीर खतरा
बाबू जी ने विशेष रूप से बीज विधेयक 2025 पर अपनी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार यह विधेयक —
भारतीय बीज व्यवस्था को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथ सौंपेगा किसानों की पारंपरिक बीज स्वतंत्रता को कमजोर करेगा राज्यों के अधिकारों को सीमित करेगा बीज संप्रभुता और खाद्य सुरक्षा पर संकट पैदा करेगा बाबू जी के शब्दों में ,सम्मेलन में प्रमुख विषय रहा —
“बीज विधेयक 2025”
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित यह विधेयक
पुराने बीज अधिनियम 1966 को बदलने के लिए लाया गया है। दावा किया जा रहा है कि यह गुणवत्ता नियंत्रण हेतु है, परंतु बाबूलाल दाहिया जी के अनुसार —
यह विधेयक भारतीय बीज क्षेत्र को बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉर्पोरेट नियंत्रण के हवाले करने की साजिश है।
“यह विधेयक जीविका आधारित भारतीय कृषि के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा।”कॉर्पोरेट नियंत्रण का खतरा बाबू जी ने बताया कि यदि यह विधेयक लागू हुआ तो —
बीज बाजार पर बड़ी कंपनियों का कब्ज़ा किसान कंपनियों पर निर्भर खेती की लागत में वृद्धि किसान की आर्थिक स्वतंत्रता पर संकट यह भारतीय किसान के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है।
कॉर्पोरेट वर्चस्व की ओर बढ़ता खतरा
इस विधेयक से —
यह विधेयक भारतीय बीज क्षेत्र को बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉर्पोरेट नियंत्रण के हवाले करने की साजिश है। इस विधेयक से —
- बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारतीय बीज बाजार पर नियंत्रण
- पारंपरिक किसान बीज व्यवस्था कमजोर
- राज्यों के संघीय अधिकार सीमित
- सार्वजनिक कृषि संस्थानों को पीछे धकेलने की व्यवस्था
- स्वदेशी बीज नेटवर्क का हाशियाकरण
जैसी स्थितियाँ बनेंगी।
यह विधेयक
जीविका आधारित भारतीय कृषि के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा।
खाद्य सुरक्षा और किसान स्वतंत्रता पर संकट बीजों पर नियंत्रण का अर्थ है —
फसल, बाजार और अंततः किसान की आज़ादी पर नियंत्रण।यदि बीज कॉर्पोरेट के हाथ में गया,तो —
खाद्य सुरक्षा और किसान स्वतंत्रता पर संकट बीजों पर नियंत्रण का अर्थ है —
फसल, बाजार और अंततः किसान की आज़ादी पर नियंत्रण।
यदि बीज कॉर्पोरेट के हाथ में गया,
तो —
- किसान बीज के लिए कंपनियों पर निर्भर होगा
- लागत बढ़ेगी
- खेती घाटे का सौदा बनेगी
- खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ेगी
देशभर के किसानों से आह्वान
किसानों से राष्ट्रीय आह्वान
बाबू जी ने देशभर के किसानों से अपील की कि बीज विधेयक 2025 के खिलाफ संगठित होकर आवाज़ उठाई जाए। सम्मेलन में संकल्प लिया गया कि 8 दिसंबर 2025 को गाँव-गाँव में बीज विधेयक की प्रतियाँ जलाकर विरोध दर्ज किया जाएगा। गुजरात से उठता संकल्प लोक निकेतन, गुजरात की धरती से उठी आवाज़ —
“बीज हमारा – अधिकार हमारा – स्वराज हमारा”
आज पूरे देश के किसानों को नई दिशा दे रही है पद्मश्री बाबूलाल जी दाहिया की गुजरात यात्रा केवल एक प्रवास नहीं,बल्कि किसान चेतना के नवजागरण का साक्षी अनुभव है।मैं उनका हृदय से आभारी हूँ कि उन्होंने कार्यक्रम की सटीक जानकारियाँ और विचार मुझसे साझा किए, जिन्हें मैं समाज तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा हूँ।
सम्मेलन से संकल्प लिया गया —
यदि बीज विधेयक 2025 वापस नहीं लिया गया,
तो 8 दिसंबर 2025 को देशभर के गाँवों में
बीज विधेयक की प्रतियाँ जलाकर विरोध दर्ज किया जाएगा।
यह आंदोलन —
बीज बचाओ
किसान बचाओ
देश बचाओ
के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा।
गुजरात की धरती से उठती चेतना
लोक निकेतन, गुजरात की भूमि से उठी यह आवाज़ —
“बीज हमारा – अधिकार हमारा – स्वराज हमारा”
आज देशभर के किसानों को नई दिशा और आत्मबल दे रही है।
निष्कर्ष
किसान स्वराज सम्मेलन 2026
केवल एक आयोजन नहीं,
बल्कि किसान चेतना के नवजागरण का राष्ट्रीय मंच है।
बाबूलाल जी दाहिया का गुजरात प्रवास
इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी है।
उनके विचार समाज के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा हैं।
आभार
मैं बाबूलाल जी दाहिया का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ
कि उन्होंने अपने अनुभव और विचार साझा कर मुझे उन्हें समाज तक पहुँचाने का अवसर दिया।
✍️ प्रस्तुति : भूपेंद्र दाहिया
ब्लॉग : dahiyabhupend.blogspot.com
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