रोमन अंक (Roman Numerals) क्या हैं? इतिहास, नियम, महत्व, उपयोग और अभ्यास प्रश्न | गणित सीखें Zero to Hero भाग-4
ब्लॉग 4 : रोमन अंक (Roman Numerals)
परिचय (Introduction)
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| PPC Dhauchat Rewa |
नमस्कार दोस्तों,
"गणित सीखें : Zero to Hero" श्रृंखला के पिछले ब्लॉगों में हमने गणित का परिचय, संख्या पद्धति तथा भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय संख्या प्रणाली को समझा। अब हम एक ऐसी संख्या प्रणाली के बारे में जानेंगे जिसका उपयोग हजारों वर्षों से किया जा रहा है और आज भी घड़ियों, पुस्तकों, स्मारकों तथा फिल्मों में देखने को मिलता है। इस प्रणाली को रोमन अंक (Roman Numerals) कहा जाता है।
रोमन अंक क्या हैं? (What are Roman Numerals?)
प्राचीन रोम (Rome) में संख्याओं को लिखने के लिए जिन विशेष प्रतीकों का उपयोग किया जाता था, उन्हें रोमन अंक कहा जाता है।
आज हम 1, 2, 3, 4 जैसी संख्याएँ लिखते हैं, लेकिन रोमन लोग I, V, X, L, C, D और M जैसे प्रतीकों का उपयोग करते थे।
रोमन अंकों का इतिहास (History of Roman Numerals)
लगभग 2500 वर्ष पहले प्राचीन रोम में व्यापार, सेना और प्रशासन के कार्यों के लिए संख्याओं की आवश्यकता पड़ी। उस समय आधुनिक संख्या प्रणाली विकसित नहीं हुई थी, इसलिए रोमन लोगों ने कुछ विशेष प्रतीकों की सहायता से संख्याएँ लिखना प्रारंभ किया। यही प्रणाली आगे चलकर रोमन अंक कहलायी।
रोमन अंकों की परिभाषा (Definition of Roman Numerals)
«प्राचीन रोम में संख्याओं को व्यक्त करने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रतीकों की संख्या प्रणाली को रोमन अंक प्रणाली (Roman Numeral System) कहा जाता है।»
रोमन अंकों के मूल प्रतीक (Basic Symbols of Roman Numerals)
रोमन अंक | मान
I | 1
V | 5
X | 10
L | 50
C | 100
D | 500
M | 1000
भारत में रोमन अंक कब आए? (When Did Roman Numerals Come to India?)
रोमन अंकों की उत्पत्ति प्राचीन रोम (वर्तमान इटली) में लगभग 500 ईसा पूर्व (BCE) हुई थी। भारत में रोमन अंक सीधे प्राचीन काल में प्रचलित नहीं थे। अंग्रेजों के शासन (British Rule) और यूरोपीय संपर्क के बाद रोमन अंक भारत में अधिक दिखाई देने लगे।
विशेष रूप से अंग्रेजी शिक्षा, घड़ियों, पुस्तकों, कानूनी दस्तावेजों और भवनों के निर्माण वर्ष लिखने में रोमन अंकों का उपयोग भारत में बढ़ा।
रोमन अंकों का उपयोग किन देशों में हुआ? (Which Countries Used Roman Numerals?)
रोमन साम्राज्य के प्रभाव के कारण रोमन अंकों का उपयोग मुख्य रूप से यूरोप के देशों में हुआ।
प्रमुख देश
इटली (Italy)
फ्रांस (France)
इंग्लैंड (England)
स्पेन (Spain)
पुर्तगाल (Portugal)
जर्मनी (Germany)
यूरोप के अन्य देश
आज भी दुनिया के कई देशों में घड़ियों, पुस्तकों, फिल्मों और स्मारकों में रोमन अंक उपयोग किए जाते हैं।
रोमन अंकों से पहले भारत में क्या उपयोग होता था? (What Was Used in India Before Roman Numerals?)
भारत में रोमन अंकों का उपयोग कभी मुख्य संख्या प्रणाली के रूप में नहीं हुआ। भारत की अपनी विकसित संख्या प्रणाली थी।
1. ब्राह्मी अंक (Brahmi Numerals)
भारत की सबसे प्राचीन संख्या प्रणालियों में से एक ब्राह्मी अंक प्रणाली थी।
इसका उपयोग लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व (3rd Century BCE) से होता था।
ब्राह्मी अंक (Brahmi Numerals)
ब्राह्मी अंक आज के अंकों जैसे नहीं दिखते थे। समय के साथ उनका रूप बदलकर आधुनिक अंक (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9) बने।
आधुनिक अंक ब्राह्मी अंक
1 𑁒
2 𑁓
3 𑁔
4 𑁕
5 𑁖
6 𑁗
7 𑁘
8 𑁙
9 𑁚
ब्राह्मी अंकों को सरल तरीके से समझें
प्राचीन भारत में लोग आज के 1, 2, 3, 4 नहीं लिखते थे। वे इनके स्थान पर विशेष चिन्हों का उपयोग करते थे, जिन्हें ब्राह्मी अंक कहा जाता था।
समय के साथ इन चिन्हों का रूप बदलता गया और बाद में देवनागरी अंक (१, २, ३, ४...) तथा फिर आधुनिक अंक (1, 2, 3, 4...) विकसित हुए।
ब्राह्मी अंकों का महत्व (Importance of Brahmi Numerals)
✅ भारत की सबसे प्राचीन संख्या प्रणालियों में से एक थे।
✅ आधुनिक संख्या प्रणाली की नींव माने जाते हैं।
✅ प्राचीन शिलालेखों, व्यापार और गणित में उपयोग किए जाते थे।
✅ भारतीय गणित के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।
रोचक तथ्य (Interesting Fact)
> रोमन अंक (I, V, X, L, C, D, M) यूरोप की देन हैं, जबकि आधुनिक अंक (0–9) जिनका आज पूरी दुनिया उपयोग करती है, उनकी जड़ें भारत की प्राचीन ब्राह्मी संख्या प्रणाली में मानी जाती हैं। 📚✍️
> भारत ने शून्य (0) और दशमलव संख्या प्रणाली देकर गणित के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है। 📚✍️
देवनागरी अंक वे अंक हैं जो देवनागरी लिपि में लिखे जाते हैं। हिंदी, संस्कृत, मराठी, नेपाली तथा कई भारतीय भाषाओं में इनका उपयोग किया जाता था और आज भी कुछ स्थानों पर किया जाता है।
देवनागरी अंकों की सूची (Devanagari Numerals)
| आधुनिक अंक | देवनागरी अंक |
|---|---|
| 0 | ० |
| 1 | १ |
| 2 | २ |
| 3 | ३ |
| 4 | ४ |
| 5 | ५ |
| 6 | ६ |
| 7 | ७ |
| 8 | ८ |
| 9 | ९ |
देवनागरी अंकों का इतिहास (History of Devanagari Numerals)
देवनागरी अंकों का इतिहास प्राचीन भारत की ब्राह्मी लिपि से जुड़ा हुआ है। लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में ब्राह्मी अंक प्रचलित थे। समय के साथ ब्राह्मी लिपि से गुप्त लिपि, फिर नागरी लिपि और बाद में देवनागरी लिपि का विकास हुआ।
इसी विकास क्रम में ब्राह्मी अंकों के रूप बदलते गए और देवनागरी अंक (०, १, २, ३...) अस्तित्व में आए।
देवनागरी शब्द का अर्थ (Meaning of Devanagari)
"देवनागरी" दो शब्दों से मिलकर बना है:
- देव = देवता या श्रेष्ठ
- नागरी = नगर में उपयोग होने वाली लिपि
अर्थात,
देवनागरी वह लिपि है जिसे श्रेष्ठ या विद्वानों की लिपि माना गया।
देवनागरी अंकों की विशेषताएँ (Characteristics of Devanagari Numerals)
✅ भारतीय मूल के अंक हैं
इनका विकास भारत में हुआ और ये भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण भाग हैं।
✅ शून्य (०) का उपयोग होता है
देवनागरी अंक प्रणाली में शून्य का प्रयोग किया जाता है, जो भारतीय गणित की एक महान देन है।
✅ दशमलव प्रणाली पर आधारित हैं
इनमें 10 अंकों (० से ९) का उपयोग करके सभी संख्याएँ बनाई जाती हैं।
✅ आधुनिक अंकों से समानता रखते हैं
आज उपयोग होने वाले 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 और देवनागरी अंक एक ही संख्या को दर्शाते हैं, केवल लिखने का तरीका अलग है।
देवनागरी अंकों का उपयोग (Uses of Devanagari Numerals)
1. हिंदी और संस्कृत साहित्य में
पुरानी पुस्तकों, ग्रंथों और पांडुलिपियों में।
2. धार्मिक ग्रंथों में
श्लोक संख्या, अध्याय संख्या आदि लिखने में।
3. सरकारी दस्तावेजों में
कुछ सरकारी प्रकाशनों और हिंदी दस्तावेजों में।
4. शिक्षा में
बच्चों को भारतीय संख्या प्रणाली सिखाने में।
ब्राह्मी → देवनागरी → आधुनिक अंक
संख्याओं का विकास इस प्रकार हुआ:
ब्राह्मी अंक → देवनागरी अंक → आधुनिक (अंतरराष्ट्रीय) अंक
उदाहरण:
- १ → 1
- २ → 2
- ३ → 3
- ४ → 4
- ५ → 5
रोचक तथ्य (Interesting Fact)
दुनिया में आज सबसे अधिक उपयोग होने वाली संख्या प्रणाली (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9) की जड़ें भारत की प्राचीन ब्राह्मी और देवनागरी अंक परंपरा में मानी जाती हैं।
भारत ने शून्य (0) और दशमलव संख्या प्रणाली देकर गणित के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है। 📚✍️
2. भारतीय-अरबी संख्या प्रणाली (Hindu-Arabic Numeral System)
भारत ने विश्व को 0 (शून्य) और दशमलव संख्या प्रणाली (Decimal System) दी।
यह प्रणाली बाद में अरब देशों के माध्यम से यूरोप पहुँची, इसलिए इसे Hindu-Arabic Numeral System कहा जाता है।
भारत का सबसे बड़ा योगदान
भारतीय गणितज्ञों, विशेषकर आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त ने शून्य (0) और दशमलव प्रणाली के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आज पूरी दुनिया जिन संख्याओं का उपयोग करती है:
0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9
उनकी जड़ें भारतीय गणित में हैं।
रोचक तथ्य (Interesting Fact)
> रोमन अंक प्रणाली में शून्य (0) नहीं था, जबकि भारत ने शून्य की खोज कर गणित को नई दिशा दी।
> आज पूरी दुनिया मुख्य रूप से भारतीय-अरबी संख्या प्रणाली का उपयोग करती है, न कि रोमन अंक प्रणाली का।
रोमन अंक यूरोप की प्राचीन रोमन सभ्यता से आए थे और बाद में अंग्रेजी शिक्षा तथा यूरोपीय प्रभाव के माध्यम से भारत में प्रचलित हुए। लेकिन भारत में इससे पहले ब्राह्मी अंक तथा भारतीय-अरबी संख्या प्रणाली का उपयोग होता था। वास्तव में आधुनिक विश्व जिस 0 से 9 तक की संख्या प्रणाली का उपयोग करता है, उसकी नींव भारत में रखी गई थी। 📚✍️
रोमन अंकों की विशेषताएँ (Characteristics of Roman Numerals)
✅ 1. इनमें केवल सात मुख्य प्रतीकों का उपयोग होता है
रोमन संख्या प्रणाली में सभी संख्याएँ केवल सात प्रतीकों I, V, X, L, C, D और M की सहायता से बनाई जाती हैं। इन्हीं प्रतीकों को अलग-अलग नियमों के अनुसार जोड़कर या घटाकर बड़ी संख्याएँ लिखी जाती हैं।
उदाहरण:
I = 1
V = 5
X = 10
✅ 2. इनमें शून्य (0) का कोई स्थान नहीं है
रोमन अंक प्रणाली उस समय विकसित हुई थी जब शून्य (Zero) की खोज नहीं हुई थी। इसलिए इस प्रणाली में शून्य को दर्शाने के लिए कोई प्रतीक नहीं बनाया गया।
उदाहरण:
आज हम 10, 20, 100 जैसी संख्याएँ लिखते हैं, लेकिन रोमन अंकों में 0 का कोई अलग चिन्ह नहीं होता।
✅ 3. यह स्थानिक मान (Place Value) पर आधारित नहीं है
भारतीय संख्या प्रणाली में किसी अंक का मान उसके स्थान के अनुसार बदल जाता है, लेकिन रोमन अंकों में ऐसा नहीं होता।
उदाहरण:
संख्या 555 में तीनों 5 का स्थान अलग-अलग होने से उनका मान भी अलग होता है।
लेकिन रोमन अंकों में V हमेशा 5 ही रहेगा, चाहे वह कहीं भी लिखा जाए।
✅ 4. बड़ी संख्याएँ छोटे प्रतीकों को जोड़कर बनाई जाती हैं
रोमन अंक प्रणाली में बड़ी संख्याएँ बनाने के लिए छोटे-छोटे प्रतीकों को एक साथ लिखा जाता है।
उदाहरण:
VIII = 5 + 1 + 1 + 1 = 8
XIII = 10 + 1 + 1 + 1 = 13
इस प्रकार कई छोटे प्रतीकों को जोड़कर बड़ी संख्या बनाई जाती है।
✅ 5. आज भी घड़ियों, पुस्तकों और स्मारकों में इनका उपयोग होता है
यद्यपि आज सामान्य गणना के लिए आधुनिक संख्या प्रणाली का उपयोग होता है, फिर भी रोमन अंक आज भी कई स्थानों पर देखने को मिलते हैं।
उदाहरण:
घड़ियों में: III, VI, IX, XII
पुस्तकों में: Chapter I, Chapter II
स्मारकों पर: निर्माण वर्ष या क्रम संख्या
फिल्मों में: Part I, Part II, Part III
इसी कारण रोमन अंक आज भी ऐतिहासिक और व्यावहारिक महत्व रखते हैं।
याद रखें (Remember)
> रोमन अंक केवल सात प्रतीकों पर आधारित होते हैं, इनमें शून्य नहीं होता, स्थानिक मान का उपयोग नहीं होता और आज भी कई महत्वपूर्ण स्थानों पर इनका उपयोग किया जाता है। 📚✍️
रोमन अंक लिखने के नियम (Rules of Roman Numerals)
नियम 1 : बड़ा अंक पहले हो तो जोड़ते हैं
उदाहरण:
VI = 5 + 1 = 6
XI = 10 + 1 = 11
XV = 10 + 5 = 15
नियम 2 : छोटा अंक पहले हो तो घटाते हैं
उदाहरण:
IV = 5 − 1 = 4
IX = 10 − 1 = 9
XL = 50 − 10 = 40
XC = 100 − 10 = 90
नियम 3 : कोई प्रतीक लगातार तीन बार से अधिक नहीं दोहराया जाता
उदाहरण:
III = 3
XXX = 30
CCC = 300
नियम 4 : V, L और D को दोहराया नहीं जाता
गलत:
VV
LL
DD
1 से 20 तक रोमन अंक (Roman Numerals 1 to 20)
1 = I
2 = II
3 = III
4 = IV
5 = V
6 = VI
7 = VII
8 = VIII
9 = IX
10 = X
11 = XI
12 = XII
13 = XIII
14 = XIV
15 = XV
16 = XVI
17 = XVII
18 = XVIII
19 = XIX
20 = XX
रोमन अंकों का महत्व (Importance of Roman Numerals)
✅ 1. इतिहास को समझने में
रोमन अंक हमें प्राचीन रोम की संस्कृति, प्रशासन और गणना पद्धति को समझने में सहायता करते हैं। इनके अध्ययन से पता चलता है कि प्राचीन समय में लोग संख्याओं का उपयोग कैसे करते थे।
उदाहरण:
पुराने दस्तावेजों, स्मारकों और ऐतिहासिक अभिलेखों में रोमन अंक देखने को मिलते हैं।
✅ 2. प्राचीन सभ्यताओं के अध्ययन में
रोमन अंक प्राचीन रोमन सभ्यता की एक महत्वपूर्ण देन हैं। इन्हें समझकर हम उस समय की शिक्षा, व्यापार और जीवन शैली के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
उदाहरण:
इतिहास की पुस्तकों में रोमन साम्राज्य से संबंधित तिथियाँ और घटनाएँ अक्सर रोमन अंकों में लिखी होती हैं।
✅ 3. प्रतियोगी परीक्षाओं में
SSC, Railway, Banking, MPPSC, UPSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में रोमन अंकों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए इनका ज्ञान परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
उदाहरण:
किसी संख्या को रोमन अंक में बदलना या रोमन अंक को सामान्य संख्या में बदलने के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
✅ 4. घड़ियों और स्मारकों को समझने में
आज भी कई घड़ियों में समय दर्शाने के लिए रोमन अंकों का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा ऐतिहासिक भवनों और स्मारकों पर निर्माण वर्ष या क्रम संख्या भी रोमन अंकों में लिखी जाती है।
उदाहरण:
घड़ी में III का अर्थ 3 बजे और XII का अर्थ 12 बजे होता है।
✅ 5. पुस्तकों के अध्याय पढ़ने में
कई पुस्तकों, शोध पत्रों और कानूनी दस्तावेजों में अध्यायों या भागों की संख्या रोमन अंकों में लिखी जाती है।
उदाहरण:
Chapter I (अध्याय 1)
Chapter II (अध्याय 2)
Chapter III (अध्याय 3)
इसलिए रोमन अंकों की जानकारी होने से ऐसे अध्यायों और भागों को समझना आसान हो जाता है।
याद रखें (Remember)
> रोमन अंक केवल एक पुरानी संख्या प्रणाली नहीं हैं, बल्कि इतिहास, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, घड़ियों, स्मारकों और पुस्तकों में आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 📚✍️
दैनिक जीवन में उपयोग (Uses of Roman Numerals in Daily Life)
घड़ियों में
कई घड़ियों में 1, 2, 3 की जगह I, II, III लिखा होता है।
पुस्तकों में
Chapter I, Chapter II, Chapter III
फिल्मों में
Movie Part II
Movie Part III
स्मारकों में
निर्माण वर्ष या क्रम संख्या लिखने में।
रोमन अंक सीखने की आसान विधि (Easy Way to Learn Roman Numerals)
रोमन अंक सीखना कठिन नहीं है। यदि आप इन्हें चरणबद्ध तरीके से सीखें, तो कुछ ही दिनों में आसानी से समझ सकते हैं।
✅ 1. सबसे पहले सात मुख्य प्रतीकों को याद करें
रोमन संख्या प्रणाली केवल सात मुख्य प्रतीकों पर आधारित है।
रोमन अंक मान
I 1
V 5
X 10
L 50
C 100
D 500
M 1000
इन सात प्रतीकों को याद कर लेने पर रोमन अंक सीखने की नींव मजबूत हो जाती है।
✅ 2. इनके मान को समझें और याद करें
केवल प्रतीक याद करना पर्याप्त नहीं है, उनके मान भी याद होने चाहिए।
उदाहरण:
I का अर्थ 1
V का अर्थ 5
X का अर्थ 10
यदि आप I, V और X याद कर लेते हैं, तो 1 से 20 तक की अधिकांश संख्याएँ आसानी से बना सकते हैं।
✅ 3. जोड़ का नियम समझें
जब छोटा या समान अंक बड़े अंक के बाद आता है, तो दोनों को जोड़ दिया जाता है।
उदाहरण:
VI = 5 + 1 = 6
VII = 5 + 1 + 1 = 7
XI = 10 + 1 = 11
✅ 4. घटाव का नियम समझें
जब छोटा अंक बड़े अंक से पहले आता है, तो उसे बड़े अंक से घटा दिया जाता है।
उदाहरण:
IV = 5 − 1 = 4
IX = 10 − 1 = 9
XL = 50 − 10 = 40
✅ 5. रोज़ थोड़ा अभ्यास करें
प्रतिदिन 5 से 10 मिनट रोमन अंकों को पढ़ने और लिखने का अभ्यास करें।
उदाहरण:
4 = IV
8 = VIII
9 = IX
15 = XV
जितना अधिक अभ्यास करेंगे, उतनी जल्दी रोमन अंक याद हो जाएंगे।
याद रखने की ट्रिक (Easy Trick)
> I = 1, V = 5, X = 10, L = 50, C = 100, D = 500, M = 1000
> बड़ा अंक पहले = जोड़ (Addition)
> छोटा अंक पहले = घटाव (Subtraction)
📚 रोमन अंक सीखने का सबसे आसान तरीका है—पहले प्रतीक याद करें, फिर उनके मान समझें, उसके बाद जोड़-घटाव के नियमों का अभ्यास करें। ✍️
निष्कर्ष (Conclusion)
रोमन अंक (Roman Numerals) प्राचीन रोम की एक महत्वपूर्ण संख्या प्रणाली है, जिसका उपयोग हजारों वर्षों से किया जा रहा है। इस ब्लॉग में हमने रोमन अंकों का इतिहास, परिभाषा, विशेषताएँ, नियम, महत्व तथा दैनिक जीवन में उनके उपयोग को समझा। हमने यह भी जाना कि रोमन अंक केवल सात मुख्य प्रतीकों I, V, X, L, C, D और M पर आधारित होते हैं तथा जोड़ और घटाव के नियमों की सहायता से बड़ी संख्याएँ बनाई जाती हैं।
यद्यपि आज सामान्य गणना के लिए आधुनिक संख्या प्रणाली (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9) का उपयोग किया जाता है, फिर भी रोमन अंक आज भी घड़ियों, पुस्तकों, फिल्मों, स्मारकों और ऐतिहासिक दस्तावेजों में देखने को मिलते हैं। इसलिए रोमन अंकों का ज्ञान न केवल गणित की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इतिहास, सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी है।
> "रोमन अंक हमें यह सिखाते हैं कि संख्या प्रणालियाँ समय के साथ बदलती रहती हैं, लेकिन ज्ञान और सीखने का महत्व हमेशा बना रहता है।"
📚 अब आप रोमन अंकों को पहचान सकते हैं, पढ़ सकते हैं और सरल संख्याओं को रोमन अंकों में लिख भी सकते हैं।
अगले ब्लॉग में
ब्लॉग 5 : जोड़ (Addition) क्या है?
जोड़ का इतिहास, परिभाषा, महत्व, नियम, दैनिक जीवन में उपयोग और अभ्यास प्रश्नों को सरल भाषा में समझेंगे। ✍️📖 हम जोड़ (Addition) को शून्य से विस्तारपूर्वक समझेंगे।
लेखक: भूपेन्द्र दाहिया
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