डिजिटल अरेस्ट क्या है? साइबर ठगी और बचाव के असली तरीके


डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) – साइबर ठगी का नया जाल

नमस्कार दोस्तों,
मैं भूपेंद्र दाहिया आज फिर से आप सभी से डिजिटल दुनिया की ही एक खास और गंभीर समस्या पर बात करने जा रहा हूँ। जैसा कि आप लोगों ने मेरे पिछले ब्लॉग्स में देखा होगा, मैंने साइबर क्राइम से जुड़े कई मुद्दों पर जानकारी साझा की है। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आज हम बात करेंगे Digital Arrest के बारे में।


डिजिटल अरेस्ट क्या है?

डिजिटल अरेस्ट असल में कोई सरकारी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह साइबर अपराधियों द्वारा रचा गया एक धोखा (Scam) है। इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, साइबर सेल या किसी सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करते हैं। वे पीड़ित को डराते हैं कि उसके खिलाफ कोई अपराध दर्ज है — जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या ऑनलाइन फ्रॉड।

इसके बाद वे कहते हैं कि –

  • “आपको अभी से डिजिटल अरेस्ट किया गया है।”
  • “आपको लगातार वीडियो कॉल पर रहना होगा, जब तक जांच पूरी न हो।”
  • “आप किसी से संपर्क नहीं कर सकते और बैंक डिटेल्स हमें देने होंगे।”
हकीकत की घटनाएँ

1. नोएडा की महिला – ₹11 लाख की ठगी

कॉल करके ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताया।

महिला से कहा गया कि उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है।

दबाव में आकर उसने ₹11 लाख अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।


2. Bengaluru में रिटायर्ड इंजीनियर – ₹1.9 करोड़ की ठगी

कॉल में बताया गया कि उनके नाम से ड्रग्स और नकली पासपोर्ट पकड़ा गया है।

वीडियो कॉल पर घंटों दबाव डालकर बैंक डिटेल्स लेकर ₹1.9 करोड़ हड़प लिए गए।

यह ठगी कैसे होती है?

  1. पहले डराने वाला कॉल आता है।
  2. वीडियो कॉल पर नकली आईडी कार्ड और ऑफिस दिखाया जाता है।
  3. घंटों तक “कस्टडी” में रखकर दबाव बनाया जाता है।
  4. आखिरकार पीड़ित से पैसे ट्रांसफ़र करवा लिए जाते हैं।

डिजिटल अरेस्ट के प्रकार

  • Law Enforcement Scam: पुलिस/CBI का बहाना बनाकर केस का डर दिखाना।
Law Enforcement Scam क्या है?

इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, NCB, ED या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर कॉल करते हैं।
वे कहते हैं कि आपके नाम से:
कोई क्राइम हुआ है (जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स पैकेट, नकली पासपोर्ट, बैंक फ्रॉड)।
या आपका SIM/Bank Account अपराध में इस्तेमाल हुआ है।
फिर वे कहते हैं – “अब आपको डिजिटल अरेस्ट किया जाता है।”
यानी घर से बाहर मत जाओ,
लगातार वीडियो कॉल पर बने रहो,
जब तक जांच पूरी न हो।

कैसे डराया जाता है?

1. आपको बताते हैं कि अगर सहयोग नहीं किया तो जेल हो जाएगी।
2. घर वालों को मत बताने का दबाव डालते हैं।
3. कहते हैं कि आपका केस सुलझाने के लिए पैसे जमा करने होंगे (as security deposit)।
4. धीरे-धीरे आपके अकाउंट से पैसे निकलवाते रहते हैं।
असलियत क्या है?
असली पुलिस/CBI कभी फोन पर Arrest या Investigation नहीं करती।
न ही वो किसी को “वीडियो कॉल पर हिरासत” में रख सकती है।
यह सिर्फ धोखाधड़ी और मनोवैज्ञानिक डराने की ट्रिक है।
  • Parcel Fraud: कहते हैं कि आपके नाम से ड्रग्स वाला पार्सल पकड़ा गया है।
Parcel Fraud: आपके नाम से ड्रग्स वाला पार्सल पकड़ा गया है
इस ठगी में फ्रॉड करने वाले खुद को कूरियर कंपनी या पुलिस/कस्टम अधिकारी बताते हैं।
वे कॉल करके कहते हैं:
“आपके नाम से जो पार्सल गया/आया है उसमें ड्रग्स, नकली पासपोर्ट, या नकली ATM कार्ड मिला है।”
“यह मामला बहुत गंभीर है, आपके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है।”
फिर कॉल को किसी “फर्जी पुलिस/CBI ऑफिसर” से जोड़ दिया जाता है।
वे बताते हैं कि अब आप जांच के दायरे में हैं और आपको डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है।

क्यों फंस जाते हैं लोग?

ड्रग्स/स्मगलिंग जैसे शब्द सुनकर लोग घबरा जाते हैं।
वे डर के कारण परिवार या दोस्तों से कुछ नहीं बताते।
लगातार दबाव डालकर उन्हें वीडियो कॉल पर कैद रखा जाता है।
अंत में उनसे Bank Account Details या पैसों की मांग की जाती है, ताकि “जांच पूरी होने तक सुरक्षा राशि जमा रहे।”

असलियत
कोई भी कूरियर कंपनी या पुलिस फोन पर ड्रग्स वाला पार्सल पकड़े जाने की सूचना नहीं देती।
अगर सचमुच पार्सल में गैर-कानूनी चीज़ मिले, तो पुलिस सीधे FIR दर्ज करके नोटिस देती है, फोन पर डराकर नहीं।
यह पूरी तरह साइबर ठगी का हिस्सा है।

  • Bank/KYC Fraud: बैंक अकाउंट फ्रीज़ होने की धमकी।
Bank/KYC Fraud: बैंक अकाउंट फ्रीज़ होने की धमकी
इस तरह के फ्रॉड में ठग खुद को बैंक अधिकारी, RBI अधिकारी या साइबर क्राइम सेल का सदस्य बताकर कॉल करते हैं।
वे कहते हैं:
“आपका KYC पूरा नहीं हुआ है।”
“आपके अकाउंट से अवैध लेन-देन हुआ है।”
“अगर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो आपका Bank Account फ्रीज़ कर दिया जाएगा।”

कैसे फंसाते हैं?
1. सबसे पहले डर का माहौल बनाते हैं – अकाउंट ब्लॉक होने का डर।
2. फिर “आपकी मदद करने” के बहाने Fake Verification Link भेजते हैं।
3. कहते हैं कि आपको तुरंत अपना Aadhaar, PAN, OTP या Net Banking Details देनी होगी।
4. कभी-कभी बोलते हैं कि “जांच पूरी होने तक आपका अकाउंट सुरक्षित रखने के लिए”
पैसे किसी नए अकाउंट में ट्रांसफर कर दो (जो असल में ठगों का अकाउंट होता है)।
5. वीडियो कॉल पर निगरानी रखकर दबाव डाला जाता है, जिसे वे Digital Arrest का नाम देते हैं।

असलियत
बैंक या RBI कभी फोन पर KYC या अकाउंट फ्रीज़ की धमकी नहीं देते।
अगर अकाउंट में सचमुच गड़बड़ी होती है, तो बैंक Official Notice या SMS/Email भेजता है और आपको ब्रांच में बुलाता है।
फोन पर कोई भी OTP, PIN, पासवर्ड या आधार डिटेल नहीं मांगी जाती।

  • Job/Loan Fraud: नकली जॉब या लोन के बाद डराना। 
Job/Loan Fraud: नकली जॉब या लोन के बाद डराना

इस तरह के फ्रॉड में ठग लोगों को नकली नौकरी (Job Offer) या आसान लोन (Loan Approval) का लालच देते हैं।

शुरुआत में वे कहते हैं:
“आपको बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई है, लेकिन पहले Processing Fee/Training Fee जमा करनी होगी।”
या “आपका Loan Approve हो गया है, बस कुछ Verification Charges देने होंगे।”

जैसे ही पीड़ित पैसे ट्रांसफर कर देता है, ठग अपना असली खेल शुरू करते हैं।

कैसे डराते हैं?

1. कहते हैं कि आपने फर्जी डॉक्यूमेंट दिए हैं, ये एक क्रिमिनल ऑफेंस है।
2. बताते हैं कि अब आपके खिलाफ कानूनी केस दर्ज हो सकता है।
3. खुद को पुलिस/CBI अधिकारी बताकर कॉल करते हैं और कहते हैं कि आप अब Digital Arrest में हैं।
4. घंटों तक वीडियो कॉल पर दबाव डालते हैं और बोलते हैं कि अगर सहयोग नहीं किया तो जेल होगी।
5. डराकर और पैसे वसूलते हैं – “Case Settlement” या “Legal Fine” के नाम पर।

असलियत
असली कंपनियाँ या बैंक कभी भी नौकरी/लोन के लिए पैसे नहीं मांगते।
अगर डॉक्यूमेंट में समस्या होती है तो वे Official Mail/Notice देते हैं, पुलिस की तरह कॉल पर डराते नहीं।
यह सिर्फ लालच + डर का कॉम्बिनेशन है जिससे लोग फंस जाते हैं।

बचाव कैसे करें?

✔ याद रखें – डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई सरकारी प्रक्रिया नहीं होती।
✔ कोई भी एजेंसी फोन/वीडियो कॉल पर आपको “गिरफ्तार” नहीं कर सकती।
✔ OTP, UPI PIN या बैंक डिटेल किसी को भी न दें।
✔ कॉल पर दबाव बनाकर पैसे मांगे जाएं तो तुरंत कॉल काट दें।
1930 पर कॉल करके तुरंत शिकायत करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।

डिजिटल युग में ठगी के तरीके भी आधुनिक हो गए हैं। “Digital Arrest” जैसे शब्द सुनकर घबराने की ज़रूरत नहीं है। यह केवल एक साइबर क्राइम का नया जाल है, जिससे बचने के लिए हमें जागरूक और सतर्क रहना होगा।

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आपका साथी –
भूपेंद्र दाहिया

धौचट रीवा मध्य प्रदेश 

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